
एक परिचय
विद्योदय जैन युवा महासंघ
ग्रीष्म काल का समापन और वर्षाकाल के आने की आहट इस बार भोपाल शहर के लिए कुछ अभूतपूर्व होने वाली थी। लगभग जून-जुलाई का महीना, वर्ष २०२१ जब गुरु आज्ञा से नव रत्न स्वरुप ९ मुनिराजों के कदम बढ़ चलते है एक नए सफर की ओर। किन्तु यह कोई लौकिक सफर नहीं था बल्कि ये तो एक कृपा दृष्टि थी उन महान संत की जिनके चरणों की रज पाने को लाखों-लाखों जैन ही नहीं वरन जैनेत्तर समाज भी पलक-पावड़ा बिछाए रहती है।।
और वे है आचार्य प्रवर श्री १०८ विद्यासागर जी महामुनिराज…इस युग के महावीर , एक ऐसे महासंत , महामुनिराज , एक ऐसे तपस्वी , एक ऐसे साधक, एक ऐसे महाकवि जिनके समक्ष सारी उपमाएँ अत्यधिक लघु हो जाती है।
किसी ने सच ही कहा है कि गुरु कृपा कब किस पर कैसे बरस जाए, ये कोई नहीं जानता। और इस बार गुरुदेव के अथाह कृपा दृष्टि बरसने वाली थी भोपाल शहर की पावन धरा पर… क्योंकि गुरु जी के चिंतन में एक महान परिकल्पना के बीजारोपण तो बहुत पहले ही हो चुका था… लक्ष्य हजारों-हजारों साल के लिए जिनधर्म जिनशासन की प्रभावना के लिए भारत देश की हृदय स्थली में बनने वाला एक महान जिनालय… श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर एम. पी. नगर , भोपाल ।
वास्तव में , कहीं न कहीं ये तो सिर्फ एक बहाना था, किंतु असल उद्देश्य तो भोपाल जैन समाज के भाग्य को पुनः जागृत करना था…जन साधारण जिसने अभी हाल ही में कोरोना जैसी भीषण महामारी के कष्टों को झेला था, और कहीं न कहीं हर एक के जीवन में अपनों से बिछुड़ जानें का गम हमारे हृदय, हमारे मन-मस्तिष्क को व्याकुल कर रहा था… आखिर है तो सभी संसारी प्राणी जो थोड़ी सी खुशियों में खुश हो जाते है किंतु विपदा की घड़ी में कई बार हमारा साहस , हमारी जीविषा कमजोर पड़ने लगती है। गमों और दुखों के इसी महाभवँर से जनसाधारण को निकालने हेतु आचार्य भगवन की कृपा दृष्टि भोपाल शहर पर भी बरसी और वो भी छप्पर फाड़के ।
पूज्य मुनि श्री १०८ संभव सागर जी मुनिराज ससंघ ९ रत्नों के रूप में भोपाल की धरा को पावन करने अब शहर में प्रवेश कर चुके थे। ९ मुनिरत्न पूज्य मुनि श्री विराट सागर जी, पूजा मुनि श्री निर्मोह सागर जी ,पूज्य मुनि श्री निष्पक्ष सागर जी , पूज्य मुनि श्री निष्काम सागर जी, पूज्य मुनि श्री नीरज सागर जी,पूज्य मुनि श्री निस्संग सागर जी, पूज्य मुनि श्री समरस सागर जी और पूज्य मुनि श्री संस्कार सागर जी साथ थे।
तिथि १३ जुलाई २०२१ , मंगलवार का वह अति शुभ दिन जब अनायास ही एक दिगंबर संत के मन में किसी एक विचार ने जन्म लिया। आखिर वीतरागी , हितोपदेशी , निष्पक्ष निष्काम मुनिराज जब हृदय में कुछ ठान लेते है, तो दुर्गम से दुर्गम लगने वाले लक्ष्य भी स्वत: ही संभव की शरण में आने को लालायित हो उठते है।
ऐसा ही एक महानतम लक्ष्य था जो पिछले अनेकों वर्षो से स्वयं में प्रश्न चिन्ह लगाए हुए था…और वह था सम्पूर्ण जैन समाज को एक सूत्र में, एकता के एक अटूट बंधन में बाँधने का लक्ष्य। लौकिक व्यवहार में एक कहावत बहुत प्रचलित है. कि ‘एक म्यान में दो तलवार नहीं रह सकती ‘ अथवा ‘ एक जंगल में दो शेर नहीं रह सकते ‘…।
वास्तव में जैन समाज की भी यही स्थिति थी , फिर चाहें शहर कोई भी हो, नगर कोई भी हो, ग्राम कोई भी हो… और ऐसा होना स्वाभाविक भी है… जैन समाज… मध्यप्रदेश ही नहीं वरन सम्पूर्ण भारत की सबसे शिक्षित समाज, सबसे अनुशासित समाज, और साथ ही संपन्नता में भी सम्पूर्ण देश ही नहीं वरन सम्पूर्ण विश्व में अपनी एक अलग पहचान रखने वाली समाज।
लेकिन कहा जाता है कि जहाँ बहुत ज्यादा मिठास होती है, वहाँ थोड़ी बहुत सड़न स्वतः ही पैदा होने लगती है। यह खेत में लगी खरपतवार के समान ही है। अतः जहाँ बहुत सारे लोग सुशिक्षित , संपन्न, और आत्मनिर्भर हो , वहाँ अक्सर लोगों के बीच लंबे समय तक एकता-सामंजस्य बनाए रख पाना बड़ा कठिन हो जाता है। आखिर वर्तमान काल में विचारों में भेद होना अथवा मतभेद होना कोई बड़ी बात नहीं है क्योंकि पंचम काल के प्रभाव से हम सब ही आधे-अधूरे ज्ञान के साथ ही तो अपनी जीवन नौका खे रहे है, और किसी ने सच ही कहा है कि अधजल गगरी झलकत जाए।
बस इसी असंभव को संभव बनाने के लिए पूज्य १०८ मुनि श्री संभव सागर ससंघ मुनिराज प्रेरणा सूत्र बने स्वयं एक निर्ग्रंथ मुनि, पूज्य मुनि श्री १०८ निष्पक्ष सागर जी महाराज… और उनके साथ थे पूज्य मुनि श्री १०८ निष्काम सागर जी महा मुनिराज और सभी संघस्थ मुनिराजों का पावन, पुनीत आशीर्वाद।
और श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर एम. पी. नगर , भोपाल के प्रांगण में , श्री १००८ आदिनाथ भगवान के चरणों में जन्म लेता है विद्योदय जैन युवामहासंघ :- १५ से ४५ वर्ष के युवाओं का एक ऐसा संगम जो भविष्य में भोपाल ही नहीं , वरन प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर पर जैन धर्म की ध्वजा पताका लहराने के लिए अपनी कमर कस चुका था।
समय का पहिया… कालचक्र अपनी गति से चलायमान था… किन्तु कुछ बदलाव तो घटित हो ही चुका था… और उदय हो चुका था… विद्योदय जैन युवामहासंघ… सेवा, समर्पण, और सहयोग की भावना को हृदय में संजोय हुए, जिसकी आहट स्वयं उसकी पहचान है… एक दिगंबर संत की परिकल्पना।
विद्योदय एक झलक में
संस्था का नाम : | विद्योदय जैन युवा महासंघ (रजि.) भोपाल |
पंजीयन क्रमांक ४: | 01/01/01/37924/21 |
पेन नंबर : | AAGAV4926L |
पंजीकृत कार्यालय : | एल. आई. जी. , 212 बी. , ई -7 11 नंबर बस स्टॉप यूनियन बैंक के पास अरेरा कॉलोनी , तहसील हुजूर , जिला भोपाल , म. प्र. |
वेबसाईट : | vidyodayyms.com |
फोन नंबर : | 9893556840 , 9826410550 |
बैंक नाम एवं शाखा | Yes Bank Mp Nagar ,Bhopal |
बैंक खाता नंबर | 011994600001124 |
बैंक आई.एफ.एस.सी | YESB0000119 |
वर्तमान सदस्य संख्या | 1300 |
क्षेत्रवार सदस्य संख्या | – |
जोन क्र. । चौक क्षेत्र | 418 |
जोन क्र. 2 लालघाटी क्षेत्र | 148 |
जोन क्र. 3 भेल क्षेत्र | 210 |
जोन क्र. 4 करोंद क्षेत्र | 252 |
ज़ोन क्र. 5 हो.बाद रोड क्षेत्र : | 182 |
संबद्ध मंदिरों की संख्या | 55 |
वर्तमान प्रमुख गतिविधियाँ
मुनिसंघ के समक्ष सामूहिक गुरुपूजा एवं द्वव्य समर्पण।
श्री विद्यासागर प्रबंधन संस्थान में 08 वृक्षों का वृक्षारोपण कार्यक्रम
श्री विद्यासागर प्रबंधन संस्थान में विशाल स्वास्थ्य शिविर।
विद्योदय के युवाओं एवं छात्र-छात्रओं को दिशाबोध एवं व्यक्तित्व विकास व्याख्यान एवं मुनि संघ द्वारा व्याख्यान।
दशलक्षण पर्व में भोपाल के समस्त जिनालयों में ऑनलाईन एवं ऑफलाईन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का सफल आयोजन।
भोपाल स्तर पर ‘जिन सुर साधक ‘ भजन गायन प्रतियोगिता का आयोजन।
आचार्य श्री के 75वें अवतरण दिवस “शरद पूर्णिमा ‘ पर 500 वाहनों एवं 5000 से अधिक श्रावकों द्वारा ऐतिहासिक विशाल धर्म प्रभावना वाहन रैली।
आचार्य श्री के 75वें अवतरण दिवस ‘ शरद पूर्णिमा ‘ पर डाक टिकट प्रदशर्नी एवं आचार्य श्री के विशेष डाक टिकट का अनावरण।
आचार्य श्री के 50वें आचार्य पदारोहण दिवस पर विशेष आवरण एवं मुद्रांक का अनावरण
भोपाल शहर के 55 से अधिक मंदिरों के 300 से अधिक जिन सेवकों को जोड़ने का महासदस्यता अभियान
इनके अतिरिक्त भी विद्योदय परिवार द्वारा अन्य धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम किए जाते है, जिसमें आप भी सहयोगी बन सकते है एवं पुण्यार्जन कर सकते है